मंगलवार, 27 अक्तूबर 2015

आज मेरी बचपन का दोस्त ले याद आज आणि मके........

दूर छा मुलुक मेरो दूर रहगे याद आज मेरी
बचपन का दोस्त ले याद आज आणि मके
स्कूल का उ बिता दिन स्कूल का मौज मस्ती 
स्कूल में लड़ाई और मार और छुट्टी का टाइम हम सब माँ प्यार
गुल्ली डंडा क्रिकेट कांचा और ले खेली छन जो मैले खेल
बाजार माँ बैठी बे खाना और खाली कराना दोस्तु की जेब
आज याद बहुत आणि हो दाजु उ बचपन का दोस्तु का साथ
आज याद आणि उ घरे की बहुत याद
प्रदेश में नौकरी निचा प्रदेश का लोग आज हुमुके ढँकने लागि
बचपन की याद और पहाड़ु की याद रूल दी हो
आना रह्या मेरो पहाड़ माँ

नौजवानों को बचाना है, उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाना है'“मेरा गाँव – मेरी पहचान”

नौजवानों को बचाना है, उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाना है'
“डांडी मार्च”
(गोपेश्वर से देहरादून – 25 अक्टूबर – 7 नवम्बर)
“मेरा गाँव – मेरी पहचान”
साथियों,
उत्तराखंड राज्य के निर्माण की जिस अवधारणा के साथ कई वर्षों तक लड़ाई लड़ी गई, वो पहाड़ का विकास आज भी प्रासंगिक है I आज भीहम सब यह सोचते रहते हैं कि पहाड़ के विकास को लेकर जनमत से चुनी सरकार कुछ न कुछ करेगी I दुर्भाग्य कि चुनी हुई सरकार पहाड़ के विकास को अपना आधार न मान बस उस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान या कार्य करने की योजना बनाती है और प्रभावशाली ढंग से क्रियान्विन करवाती है, जहाँ उन्हें विधानसभा की अधिकतर सीटों का फायदा हो सके, जनसँख्या के आधार पर हुए परिसिमन से पहाड़ उपेक्षित महसूस करता है I बस लच्छेदार बातें व विश्व स्तरीय बैठकों में मनन का विषय बन कर व अवार्ड पाने का एक बहुत सुन्दर जरिया बनके रह गया है I
विचारणीय पहलु यह है कि पहाड़ आम जनता का विकास का केंद्र या आधार न बन कर कई तरह के बाहरी उद्योग का केंद्र बनता जा रहा है, जहान्स्थानिया संसाधनों का उपयोग तो होता है लेकिन जनता की भागीदारी न होकर कुछ पूंजीपति, ठेकेदार, शराब माफिया, क्रेशेर माफिया, भू-माफिया, बड़े उद्योगपति, इत्यादि के आर्थिक श्रोत बन कर रह गए हैं I आगामी चुनाव में पार्टी फण्ड के लिए देन दारो के लिये खुश व फण्ड लेने के जरिये निर्मित किया जा सके I अपने आसपास चाटुकार व्यक्तियों को और फायदा पहुँचाना यह सरकार की प्राथमिकता हो गयी है I यही नही ९०% यह कार्य सामूहिक सह्भागीता से न होकर व्यक्तिविशेष सह्भागेता तक ही सीमित है I पहाड़ यानी माफिओं का कार्य स्थल, आर्थिकी की वृद्धि का जरिया I सहभागीता न होने के कारन जनता को न तो रोजगार मिल प् रहा है न तो सुविधा, न मूल भूत सुविधायें बल्किन पलायन का रुख अपनाना पड़ रहा है I अब हालात यह है कि उद्योग के नाम पर सरकार भांग की खेती के लिए लाइसेंस देने की बात कर रही है I एक तरफ सरकार नशा मुक्त उत्तराखंड की बात करती है ओर दूसरी तरफ पहले गाँव-गाँव तक शराब पहुँचाने के लिए शराब की दूकान खुलवाती है और अब भांग किखेती का लाइसेंस देने की बात कर रही है I पहाड़ के नौजवानो की अस्मिता व वजूद पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता यह नशाखोरी का उद्योग, आखिर नौजवानों के लिए सिर्फ नशाखोरी वाले उद्योग ही एक मात्र विकल्प है - रोजगार के नाम पे ? सवाल उठता है उस सार्थकता का जिसका तर्क सरकार देती है, सरकार चाहे कितने कड़े क़ानून बना ले, नशे की खेती का लाइसेंस मिलने से कैसे आम व्यक्ति व नौजवान इस नशे की चपेट से बचा पाएगी I हमारी पहाड़ की संस्कृती, सभ्यता व वैचारिक धरोहर व नौजवानों के भविष्य को ताकपर रख कर माफियाओं को पहाड़ में अपने पैर जमाने का मौका दिया जा रहा है I जल, जंगल, जमीन के साथ साथ हमारे पास जवानी ही एक मात्र बहुमुल्य धरोहर है, इसको संरक्षित रखना बहुत जरुरी है I हम पहले ही पहाड़ की सबसे बड़ी शक्ति मात्र शक्ति को खंडित होते देख चुके हैं, जिसको सरकार द्वारा शराब के लाइसेंस मे महिलाओ के नाम आवेदन से शक्ति को तोड़ने का सफल प्रयास किया I
आइये अपने अस्तित्व की रक्षा व पहाड़ की मर्यादा को बचाने के लिए नैतिकता की लड़ाई लडें I राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने नमक को लेके डांडी मार्च किया आज ह्म नशे की खेती के विरोध में डांडी मार्च कर रहे हैं, आइये नशामुक्त उत्तराखंड की लड़ाई में साथ आगे बड़े I
उत्तराखंड में अपनी मूल भूत सुविधाओं को लेके पहाड़ के लोग आन्दोलनरत है, सरकार मौन है I सरकार इन आन्दोलनों के प्रति अपनी जवाबदेही तय करें व श्वेत पत्र जारी करें I डांडी मार्च के देहरादून पहुँचने पर सरकार की जवाबदेही व ग्रामीणों के आंदोलनों के समर्थन में देहरादून के गाँधी पार्क में ८ नवम्बर से सत्याग्रह शुरू किया जाएगा I
“सत्याग्रह”
(जनांदोलनो की आवाज)
8 नवम्बर, गांधी पार्क, देहरादून, प्रातः 10 बजे

(गोपेश्वर से देहरादून – 25 अक्टूबर – 7 नवम्बर)
“मेरा गाँव – मेरी पहचान”
साथियों,
उत्तराखंड राज्य के निर्माण की जिस अवधारणा के साथ कई वर्षों तक लड़ाई लड़ी गई, वो पहाड़ का विकास आज भी प्रासंगिक है I आज भीहम सब यह सोचते रहते हैं कि पहाड़ के विकास को लेकर जनमत से चुनी सरकार कुछ न कुछ करेगी I दुर्भाग्य कि चुनी हुई सरकार पहाड़ के विकास को अपना आधार न मान बस उस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान या कार्य करने की योजना बनाती है और प्रभावशाली ढंग से क्रियान्विन करवाती है, जहाँ उन्हें विधानसभा की अधिकतर सीटों का फायदा हो सके, जनसँख्या के आधार पर हुए परिसिमन से पहाड़ उपेक्षित महसूस करता है I बस लच्छेदार बातें व विश्व स्तरीय बैठकों में मनन का विषय बन कर व अवार्ड पाने का एक बहुत सुन्दर जरिया बनके रह गया है I
विचारणीय पहलु यह है कि पहाड़ आम जनता का विकास का केंद्र या आधार न बन कर कई तरह के बाहरी उद्योग का केंद्र बनता जा रहा है, जहान्स्थानिया संसाधनों का उपयोग तो होता है लेकिन जनता की भागीदारी न होकर कुछ पूंजीपति, ठेकेदार, शराब माफिया, क्रेशेर माफिया, भू-माफिया, बड़े उद्योगपति, इत्यादि के आर्थिक श्रोत बन कर रह गए हैं I आगामी चुनाव में पार्टी फण्ड के लिए देन दारो के लिये खुश व फण्ड लेने के जरिये निर्मित किया जा सके I अपने आसपास चाटुकार व्यक्तियों को और फायदा पहुँचाना यह सरकार की प्राथमिकता हो गयी है I यही नही ९०% यह कार्य सामूहिक सह्भागीता से न होकर व्यक्तिविशेष सह्भागेता तक ही सीमित है I पहाड़ यानी माफिओं का कार्य स्थल, आर्थिकी की वृद्धि का जरिया I सहभागीता न होने के कारन जनता को न तो रोजगार मिल प् रहा है न तो सुविधा, न मूल भूत सुविधायें बल्किन पलायन का रुख अपनाना पड़ रहा है I अब हालात यह है कि उद्योग के नाम पर सरकार भांग की खेती के लिए लाइसेंस देने की बात कर रही है I एक तरफ सरकार नशा मुक्त उत्तराखंड की बात करती है ओर दूसरी तरफ पहले गाँव-गाँव तक शराब पहुँचाने के लिए शराब की दूकान खुलवाती है और अब भांग किखेती का लाइसेंस देने की बात कर रही है I पहाड़ के नौजवानो की अस्मिता व वजूद पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता यह नशाखोरी का उद्योग, आखिर नौजवानों के लिए सिर्फ नशाखोरी वाले उद्योग ही एक मात्र विकल्प है - रोजगार के नाम पे ? सवाल उठता है उस सार्थकता का जिसका तर्क सरकार देती है, सरकार चाहे कितने कड़े क़ानून बना ले, नशे की खेती का लाइसेंस मिलने से कैसे आम व्यक्ति व नौजवान इस नशे की चपेट से बचा पाएगी I हमारी पहाड़ की संस्कृती, सभ्यता व वैचारिक धरोहर व नौजवानों के भविष्य को ताकपर रख कर माफियाओं को पहाड़ में अपने पैर जमाने का मौका दिया जा रहा है I जल, जंगल, जमीन के साथ साथ हमारे पास जवानी ही एक मात्र बहुमुल्य धरोहर है, इसको संरक्षित रखना बहुत जरुरी है I हम पहले ही पहाड़ की सबसे बड़ी शक्ति मात्र शक्ति को खंडित होते देख चुके हैं, जिसको सरकार द्वारा शराब के लाइसेंस मे महिलाओ के नाम आवेदन से शक्ति को तोड़ने का सफल प्रयास किया I
आइये अपने अस्तित्व की रक्षा व पहाड़ की मर्यादा को बचाने के लिए नैतिकता की लड़ाई लडें I राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने नमक को लेके डांडी मार्च किया आज ह्म नशे की खेती के विरोध में डांडी मार्च कर रहे हैं, आइये नशामुक्त उत्तराखंड की लड़ाई में साथ आगे बड़े I
उत्तराखंड में अपनी मूल भूत सुविधाओं को लेके पहाड़ के लोग आन्दोलनरत है, सरकार मौन है I सरकार इन आन्दोलनों के प्रति अपनी जवाबदेही तय करें व श्वेत पत्र जारी करें I डांडी मार्च के देहरादून पहुँचने पर सरकार की जवाबदेही व ग्रामीणों के आंदोलनों के समर्थन में देहरादून के गाँधी पार्क में ८ नवम्बर से सत्याग्रह शुरू किया जाएगा I
“सत्याग्रह”
(जनांदोलनो की आवाज)
8 नवम्बर, गांधी पार्क, देहरादून, प्रातः 10 बजे

"कभी हंस भी लिया करो"


नमस्कार मित्रोँ


नमस्कार मित्रोँ



C M Harish Rawat greets Miss Universe participant Miss Urvashi Rautela


सोने से पहले सोते हुए हनुमानजी के दर्शन जरूर करे .. और कमेन्ट बॉक्स में लिखे जय श्री राम ......!! 1 like = 1 comment 1 comment = 100 like 1 Share = 1000 like


सोमवार, 12 अक्तूबर 2015

Happy Navratri Friends

Maa ki jyoti me noor milta h,
Sabke dilo ko surur milta h.
Jo bhi jata hai maa ke darwar me,
Ushe kuch na kuch jarur milta h ...

शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2015

भूमि पर अवैध निर्माण की शिकायत........

संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : जिले के द्वारसों स्थित वन पंचायत डीडा के ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को एसडीएम ¨रकू बिष्ट से मिलकर एक संस्था पर गांव में अवैध निर्माण का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में स्थानीय लोगों की नाप व बेनाप भूमि है, जिसमें गांव का चरागाह भी है। पिछले कुछ दिनों से एक संस्था अनुमति के बगैर यहां अवैध रूप से निर्माण कार्य कर रही है, .....www.jagran.com